Takeover website art for next month?

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Kahwa - the tea of Kashmir
Poetry

Kahwa (कहवा)

अर्सों हो गए एक कप गरमा-गरम कहवा पिए हुए,उस अंगीठी के आगे-पीछे बैठे हुएऔर अपने दिलों को हल्का किये हुए! वो कहानियां भीन जाने कहाँ गुम सीहो गयी,जिन्हें कहवे के घूंट संग पीते थेमानो वह चीनी से नमक हो गयी! उस कहवे में क़ैद दिलों की गर्माहट थीअब तो जैसे…

A few droplets of water
Poetry

Kuch boond zindagi

कुछ बूँद ज़िन्दगीगवा दी हमनेज़रुरत से ज़्यादाज़रुरत के नाम पेअगर सोचें ज़रा ब्रश करते रहेसाबुन मलते रहेछई छप छईएक बारी में टंकी खाली हो गयी भला धोये हमने भरतनगाड़ियां भी धुलती रहीधुले रोज़ बरामदे पानी की नालियां बनती रहीजो चाहते हम तो खिला सकती थी बगीचा हरा-भरा स्कूलों…

Silence is the noisiest of all
Poetry

Silence, the noisiest of all

Silence, I sayis not peacefulIt is bellicose, belligerent, beguileguarded in the cloaks of calm, composure and zen! It has this uncanny abilityto hit you hard,punch you in the stomachat the odd-est hourswhen you do not expect it at all! But after all these yearsof being bitten…

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